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क्रेडिट कार्ड देने वाले बैंकों को अब ग्राहकों के अधिकारों के प्रति जवाबदेह भी बनना होगा



मुंबई।। 2 साल, 7 महीने और 11 दिन के बाद थाने कोर्ट से एतिहासिक फैसला आया क्रेडिट कार्ड धारक के हित में।

जैसे पता होगा KYC भरने के बाद भी कई बार फोन आते हैं आपकी  KYC अपडेट करें। और इस चक्कर में कई सर्विस बंद कर देते हैं बैंक।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 

डॉ. रेखा चौधरी को अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक के खिलाफ बड़ी जीत मिली। भारत की वेलनेस एंबेसडर डॉ. रेखा चौधरी को ठाणे जिला उपभोक्ता आयोग से बड़ी राहत मिली है। यह मामला अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक द्वारा दी गई क्रेडिट कार्ड सेवाओं से जुड़ा था।


ठाणे जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (अतिरिक्त) ने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान आयोग के अध्यक्ष और सदस्यगणों ने L R & Associates, एडवोकेट्स और सॉलिसिटर्स जो डॉ. रेखा चौधरी की ओर से पेश हुए थे और एडवोकेट प्रणिता केलकर, जो अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद आयोग ने 7 जनवरी 2025 को एक विस्तृत आदेश जारी किया, जिसमें अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक को डॉ. चौधरी को खराब सेवा देने का दोषी ठहराया गया।


डॉ. रेखा चौधरी, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौंदर्य और वेलनेस इंडस्ट्री में एक प्रतिष्ठित नाम हैं, One Line Wellness Pvt. Ltd. की मालिक भी हैं। वह पिछले 10 वर्षों से अमेरिकन एक्सप्रेस की प्लेटिनम क्रेडिट कार्ड धारक थीं। विवाद तब शुरू हुआ जब 24 जनवरी 2020 को बैंक ने नवीन सी. बी. शंकर के नाम पर जारी उनके सप्लीमेंट्री कार्ड को KYC (नो योर कस्टमर) न होने का कारण बताकर ब्लॉक कर दिया।


हालांकि, जांच में यह सामने आया कि डॉ. चौधरी ने 16 जनवरी 2020 को ही सभी जरूरी KYC दस्तावेज बैंक को सौंप दिए थे, और बैंक ने इन दस्तावेजों को स्वीकार भी कर लिया था। इसके बावजूद, बैंक ने कोई पूर्व सूचना दिए बिना कार्ड ब्लॉक कर दिया।


कार्ड ब्लॉक करने से क्या नुकसान हुआ? कार्ड ब्लॉक करने का समय बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि उसी दिन डॉ. चौधरी का एक ऑनलाइन सेल इवेंट Shopify प्लेटफॉर्म पर होने वाला था, जहां यह कार्ड पेमेंट के लिए लिंक था। इस घटना से उन्हें बड़ा नुकसान हुआ।


बैंक की और भी लापरवाहियाँ सामने आईं इसके बाद, मार्च 2020 में बैंक ने डॉ. चौधरी का मुख्य क्रेडिट कार्ड भी ब्लॉक कर दिया और फिर अप्रैल 2020 में उनके सभी कार्ड रद्द कर दिए। बैंक ने दावा किया कि उनके ऊपर ₹11,50,213.14 का बकाया था, लेकिन आयोग की जांच में पता चला कि डॉ. चौधरी ने यह बकाया 8 सितंबर 2020 को ही चुका दिया था, जबकि बैंक ने गलत जानकारी देते हुए दावा किया कि यह भुगतान सितंबर 2021 में किया गया था।


बैंक की कार्यशैली पर आयोग का सवाल

आयोग ने बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। खासतौर पर KYC को लेकर बैंक का दोहरा रवैया संदेह के घेरे में आया। आयोग ने पूछा कि अगर KYC नियम इतने सख्त थे, तो बाद में सिर्फ एक फोन कॉल के आधार पर सप्लीमेंट्री कार्ड अनब्लॉक कैसे कर दिया गया?


आयोग का फैसला

आयोग ने डॉ. चौधरी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक को दोषी ठहराया।


हालांकि, आयोग ने डॉ. चौधरी की क्रेडिट कार्ड को फिर से चालू करने और ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग को अस्वीकार कर दिया, लेकिन उन्हें मानसिक प्रताड़ना और बैंक की खराब सेवा के लिए ₹1,00,000 का मुआवजा और ₹10,000 मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश दिया।


आदेश के अनुसार, बैंक को यह राशि आदेश की प्रति प्राप्त करने के 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी।


इस फैसले का महत्व

यह मामला उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, खासकर क्रेडिट कार्ड सेवाओं में KYC प्रक्रियाओं और बैंक की ग्राहक संचार प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर। इस फैसले से ग्राहकों को उनके अधिकारों की सुरक्षा और बैंकों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।

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