कल्पवासियों और संतों को निर्मल गंगा का प्रवाह मिलेगा या नहीं यह काफी हद तक गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इच्छा शक्ति पर निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दिनों माघमेले की समीक्षा के दौरान अफसरों को हिदायत दे चुके हैं, कि गंगा में गिरने वाले नालों को बंद कर दिया जाए, ताकि माघ मेले में संतों-भक्तों को निर्मल गंगा की धारा डुबकी लगाने के लिए प्राप्त हो सके, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका है।
कानपुर की टेनरियों के अलावा शिवकुटी, झूंसी और दारागंज के नालों से गंदा पानी गंगा में सीधे जा रहा है। इससे रामघाट से लेकर कई घाटों पर सोमवार को काला और मटमैला गंगा जल आने लगा। काला गंगा जल देखे जाने के बाद तीर्थपुरोहितों ने कड़ी नाराजगी जताई है। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश चंद्र मिश्र ने टेनरियों के साथ ही शहर के नालों से गंदा पानी गंगा में बहाए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिवकुटी, दारागंज, झूंसी और अरैल के नालों को बंद नहीं किया गया तो तीर्थपुरोहित मेला प्रशासन का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
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